Sunday, February 20, 2011

Jeet ya Haar

क्या सिर्फ जीत महतवपूर्ण है ? 

लोग कहते है की जिंदगी में जीत ही सब कुछ है , लेकिन मैं आजतक ये नहीं समझ पाया हूँ की लोग हार को गलत क्यों समझते है !लोग हार से डरते क्यों है इतना ,हार तो मौका देती है और बेहतर करने का.....हार हिम्मत को तोडती नहीं जोडती है कुछ और बेहतर करने का मौका देती है  ! मैंने भी अपनी जिंदगी में कई बार हार देखी है और मैंने हारने के डर के कभी कोशिश करना नहीं छोड़ा.
जो लोग मेरे करीब है वो लोग जानते है की मैं कैसे सोचता हूँ हार के बारे में :

"ना तो अभी कोशिश करने से पहले भी है और बुरे से बुरा " ना  (हार) " कोशिश करने के बाद भी हो सकती है इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता" !

मैं ये नहीं कह रहा हूँ की हारना अच्छा है पर मुझे लगता है की हार भी अपने आप में उतनी ही जरुरी है जितनी की जीत ! जीतना सबको अच्छा लगता है पर उस जीत के सही मायने समझने के लिए हार को महसूस करना बहुत जरुरी है !
कुछ लोग शायद मुझे यहाँ गलत समझे  ,मैं ये नहीं कहना चाहता की जीतने से पहले एक बार हार के देखो ...... बस कहने का मतलब सिर्फ इतना ही की :

"आसमान की ऊंचाई को महसूस करने के लिए ज़मीन की गहराई की अंदाज़ा होना जरुरी है !"

हार को महसूस करके जीतने का जो मज़ा है वो एक अलग ही होता है ,और मैं ये भी कहना चाहता हूँ की इंसान को अपनी हार को इस तरह से लेना चाहिए की मुझे एक और मौका मिला है और बेहतर करने का !

जीत एक नशा होता है ,और जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए इस नशे का आदि  होना बहुत जरुरी है........
पर जीत की नशे में इतना भी चुर्र नहीं होना चाहिए की कोशिश सही से ना कर पाए , मैंने ऐसे लोगो को भी टूटते हुए देखा है जो हमेशा जीतते है और बस एक हार उन्हें अंदर से तोड़ देती है , मैंने बहुत कोशिश की है उन्   भावनाओ को समझने की पर अभी तक मैं कामयाब नहीं हुआ हूँ ,मेरी कोशिश जारी है !!!

क्यूंकि जीत संगर्ष से मिलती है ,और संघर्ष का नाम ही जिंदगी है !!